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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण

रा.स्वा.प्रा. के बारे में


राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (रा.स्वा.प्रा.) भारत की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा/आश्वासन योजना "आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना" को देश भर में लागू करने के लिए सर्वोच्च निकाय है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की पूर्ववर्ती निकाय राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी थी, जो 23 मई, 2018 से एक पंजीकृत संस्था के रूप में कार्य कर रही थी। प्राधिकरण को पूर्ण कार्यात्मक स्वायत्तता देने के लिए कैबिनेट के आदेशानुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी को गजट अधिसूचना पंजीकृत DL–(N) 04/0007/2003-18 के अंतर्गत, 2 अगस्त, 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के रूप में पुनर्गठित किया गया।

रा.स्वा.प्रा. का गठन, राष्ट्रीय स्तर पर, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लागू करने के किया गया है, जो “पीएम-जय” के नाम से लोकप्रिय है। पूर्ण कार्यात्मक स्वायत्तता के साथ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय, रा.स्वा.प्रा. एक शासी निकाय द्वारा संचालित है जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री करते हैं। प्राधिकरण की अध्यक्षता और संचालन का उतरदायित्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) का होता है जो भारत सरकार के सचिव रैंक के अधिकारी और शासी निकाय के पूर्व-कार्यालय सदस्य सचिव हैं।

योजना को राज्य स्तर पर लागू करने के लिए, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं (रा◦ स्वा◦ स◦) को एक संस्था/ट्रस्ट के रूप में राज्यों द्वारा स्थापित किया गया है। राज्य में योजना के कार्यान्वयन पर रा◦ स्वा◦ स◦ के पास पूर्ण परिचालन स्वायत्तता है, जिसमें गैर एस-ई-सी-सी लाभार्थी भी शामिल हैं।


रा.स्वा.प्रा. के कार्य
  • पीएम-जय से जुड़े विभिन परिचालन, मानकीकरण, मॉडल दस्तावेजों और अनुबंधों से संबंधित दिशानिर्देशों का निर्माण।
  • राज्यों/संघ राज्यों को प्रति वर्ष प्रीमियम (या ट्रस्टों के लिए अधिकतम केंद्रीय योगदान) के लिए केंद्रीय सीमा निर्धारित करना और क्षेत्र सर्वेक्षण और बीमांकिक विश्लेषण के आधार पर, समय-समय पर, इसकी समीक्षा करना।
  • उपचार प्रोटोकॉल, गुणवत्ता प्रोटोकॉल, न्यूनतम प्रलेखन प्रोटोकॉल, डेटा साक्षीकरण प्रोटोकॉल, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल, धोखाधड़ी रोकथाम और नियंत्रण सहित दंड प्रावधानों इत्यादि के लिए मानकों का अनुपालन और विकास करना।
  • पीएम-जय के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की सामरिक खरीद के लिए प्रक्रिया तैयार करना, ताकि सरकार के निवेश पर सर्वोत्तम लाभ मिल सके। पारदर्शी, पूर्वानुमानित और सबूत-आधारित प्रक्रिया के आधार पर पैकेज और उनकी दरों की एक सूची तैयार करके उन्हें समय-समय पर अपडेट करना और सामरिक खरीद के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाना।
  • स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के भुगतान के लिए प्रभावी और कुशल प्रक्रिया स्थापित करना।
  • विभिन स्वास्थ्य बीमा/आश्वासन योजनाओं के साथ, पीएम-जय के अभिसरण के लिए प्रक्रियाएँ तैयार करना। इसमें राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों द्वारा, कार्यान्वित की जाने वाली योजनाएँ शामिल होंगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, औपचारिक और अनौपचारिक, दोनों क्षेत्रों के कर्मियों को लाभान्वित करने वाली योजनाओं के साथ पीएम-जय को जोड़ने की प्रक्रिया का भी विकास करेगी।
  • आवश्यक स्वास्थ्य घटकों के साथ अत्याधुनिक स्वास्थ्य सूचना प्रौद्योगिकी संजाल का निर्माण करना जिस से पीएम-जय और अन्य स्वास्थ्य प्रणालियों की जोड़ा/लिंक किया जा सके; सूचना प्रौद्योगिकी मानकों को इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के परामर्श से विकसित किया जाएगा।
  • भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से विभिन स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों, विशेष रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के साथ, पीएम-जय को जोड़ने के उपाय व विकल्पों का अन्वेषण करना।
  • बीमा कंपनियों, तीसरे पक्ष के प्रशासकों, अस्पतालों और अन्य हितधारकों को लाभान्वित करने वाले स्वास्थ्य बीमा विनियमों के विकास और कार्यान्वयन पर बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करना।
  • देश भर में पीएम-जय का प्रभावी क्रियान्वयन और इसकी नियमित नियंत्रण व जाँच करना जिसमें, समय समय पर, सुधार और शोधन की कार्रवाइयां शामिल हैं।
  • पीएम-जय के कार्यान्वयन के लिए नियमित रूप से विभिन्न राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना।
  • राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं और अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण में निरंतर तत्पर रहना।
  • योजना के बारे में लाभार्थियों और अन्य हितधारकों में जागरूकता फैलाने के लिए गतिविधियों का संचालन करना।
  • धोखाधड़ी गतिविधियों और दुरुपयोग की रोकथाम, पहचान और नियंत्रण सम्बंधित कार्य करना।
  • विभिन्न स्तरों पर सभी हितधारकों के लिए शिकायत निवारण करना।
  • योजना के लिए एक कुशल नियंत्रण व जाँच प्रणाली की स्थापना करना।
  • राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं का साझाकरण बड़ाना और इन प्रथाओं का प्रलेखन करना।
  • केंद्रीय मंत्रालयों की योजनाओं के बीच मानकीकरण और अभिसरण सुनिश्चित करना।
  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान साझा करने और सूचना प्रसार सहित नीति संगत अनुसंधान और मूल्यांकन अध्ययनों के संचालन की सुविधा प्रदान करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों, अन्य सार्वजनिक और निजी संस्थानों के साथ सामरिक साझेदारी और सहयोग विकसित करना, जिनमें नॉट-फॉर-प्रॉफिट अशासकिय संस्थान, बैंक, बीमा कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान जैसे विश्वविद्यालय, मिशन, थिंक टैंक और विभिन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निकाय शामिल है जो पीएम-जय के उद्देश्यों से संबंधित कार्य करतीं हैं।
  • नीति निर्माताओं को योजना के तथ्य और अन्य अनुसंधान/मूल्यांकन उपलब्ध कराना ताकि सरकार साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण कर सके।
  • राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करना जो राज्यों में पीएम-जय को लागू करने के लिए स्थापित की गईं हैं।
  • योजना के क्रियान्वयन, भर्ती नियमों और कर्मचारियों की नियुक्ति, राज्यों को अनुदान सहायता के संवितरण और आवश्यकतानुसार, समय-समय पर प्रासंगिक दिशा-निर्देश जारी करने से संबंधित कोई भी निर्णय लेना।
  • और समय-समय पर भारत सरकार द्वारा सौंपी गई अन्य सभी गतिविधियाँ।

शासी निकाय


राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (रा.स्वा.प्रा.) एक शासी निकाय द्वारा संचालित की जाती है जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री करतें हैं। प्राधिकरण के संचालन का उत्तरदायित्व एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) के नेतृत्व में होता है, जो इस कार्य को रा.स्वा.प्रा. के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (अडिशनल सी ई ओ), उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (डिप्टी सी ई ओ) और अन्य कार्यकारी निर्देशकों के सहयोग और समर्थन से निर्वाह करते हैंं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) शासी निकाय के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

शासी निकाय में अध्यक्ष और 11 सदस्य शामिल हैं।

शासी निकाय के सदस्यों की सूची:
  • अध्यक्ष: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, भारत सरकार
  • सदस्य: मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति आयोग, भारत सरकार (पदेन)
  • सदस्य: सचिव (व्यय), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार (पदेन)
  • सदस्य: सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (पदेन)
  • सदस्य 4 और 5: दो विशेषज्ञ प्रशासनिक, बीमा, सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य प्रदाता, अर्थशास्त्र, सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्रबंधन इत्यादि के क्षेत्र से।
  • सदस्य (6-10): राज्य सरकार के पांच प्रमुख (स्वास्थ्य) सचिव (प्रत्येक, घूर्णी आधार पर, देश के पाँच क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं यथार्थ; उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर पूर्व), और
  • सदस्य: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) (पदेन)
शासी निकाय की शक्तियाँ और कार्य
  • शासी निकाय राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की सर्वोच्च निर्णय प्राधिकारी है और पीएम-जय और प्राधिकरण से संबंधित सभी मामलों के लिए उत्तरदायी है।
  • शासी निकाय प्राधिकरण के कर्मचारियों की नियुक्ति, चयन, भर्ती नियमों का गठन और उससे सम्बंधित सभी प्रक्रियाओं की रूपरेखा तैयार करती है।
  • पारदर्शिता के हित में, एक सार्वजनिक परामर्श मार्ग का अनुसरण करते हुए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के नाम पर जारी सभी प्रमुख नियमों को शासी निकाय की अनुमति की आवश्यकता होती है।
  • शासी निकाय, रा.स्वा.प्रा. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ), को वो शक्ति सौंप सकती है, जो उसे उपयुक्त लगे।
  • शासी निकाय पीएम-जय के सुचारू संचालन के लिए, उपयुक्त क्षेत्रों मे, उप-समिति का गठन कर सकती है।
  • प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) के द्वारा लिए गए निर्णय और मुद्दों की समीक्षा करने के लिए शासी निकाय, कम से कम, साल में चार बार बैठक करेगी।
  • शासी निकाय, समय-समय पर, रा.स्वा.प्रा. के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी, जिसमें निकाय द्वारा समीचीन आवंटित राशि का व्यय भी शामिल है।
  • आवंटित कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालन करने के लिए, शासी निकाय के माध्यम से, रा.स्वा.प्रा. के निम्नलिखित उत्तरदायित्व है:
    • प्राधिकरण के प्रबंधन, प्रशासन और अन्य गतिविधियों के संचालन के लिए प्रशासनिक व वित्तीय प्रक्रियाओं और नीतियों का गठन, संशोधन और काम पर नियुक्ति/उपयोग/संसाधन जुटाने से सम्बंधित विभिन्न कार्यों की आउटसोर्सिंग, बजटीय सहायता और बैंक खातें (एस्क्रो या अन्य प्रकार के खाते, स्तिथि अनुसार) के लिए दिशा-निर्देशों सहित धन जारी करना।
    • प्राधिकरण के उद्देश्यों का निर्वाह करने के लिए आवश्यक चल या अचल संपत्ति का अधिग्रहण, किराया या लीज पर लेना, और उनके रखरखाव का उत्तरदायित्व।
    • प्राधिकरण के उद्देश्यों को प्राप्त करने से सम्बंधित अनुबंध और अन्य उपकरणों की पहल करना।
    • भारत सरकार से बजटीय सहायता प्राप्त करना एवं, यदि संभव हो, तो प्राधिकरण के लिए अतिरिक्त धन राशि को एकत्रित करना।
    • प्राधिकरण के उद्देश्यों का पूर्णतः निर्वाह करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, अन्य सार्वजनिक और निजी संस्थानों के साथ सामरिक साझेदारी और सहयोग विकसित करना, जिनमें गैर लाभकारी अशासकिय संस्थान, बैंक, बीमा कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान जैसे विश्वविद्यालय, मिशन, थिंक टैंक और पीएम-जय के उद्देश्यों से संबंधित प्रासंगिक क्षेत्रों में अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निकाय शामिल हैं।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी


राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (रा.स्वा.प्रा.) के लिए, एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ), जो भारत सरकार के सचिव पद के समकक्ष हैं, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जातें हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, शासी निकाय के पदेन सदस्य सचिव हैं जिनको, पीएम-जय के कार्यान्वयन के लिए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पूर्ण परिचालन का नियंत्रण है। परंतु, सभी नीतिगत कार्यों के लिए, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, शासी निकाय के आधीन और उनके मार्गदर्शन पे काम करतें हैं। वे प्राधिकरण के शासी निकाय द्वारा नियुक्त सभी कर्मचारियों पर पूर्ण प्रशासनिक अधिकार रखतें हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारत सरकार के वित्तीय सचिव की शक्तियों का भी अधिकार रखतें हैं जो GFR एवं भारत सरकार के वित्तीय नियमों के तहत उनको दी गईं हैं।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) की शक्तियां और कार्य:
  • प्राधिकरण का दैनिक प्रशासन। इस प्रयोजन के लिए, वह शासी निकाय के अध्यक्ष को रिपोर्ट करतें हैं।
  • प्राधिकरण द्वारा अपनाए गए कार्यक्रमों और निर्णयों को लागू करना।
  • शासी निकाय के निर्णयों और कार्यक्रमों के लिए प्रस्ताव तैयार करना।
  • प्राधिकरण के बजट का निष्पादन और उसके राजस्व और व्यय का विवरण तैयार करना।
  • नियमों द्वारा उल्लिखित किए गाए वो सभी कार्य व शक्तियों का निर्वाह करना।
  • शासी निकाय द्वारा निर्धारित, प्राधिकरण के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का अनुपालन सुनिश्चित करना; तथा
  • भारत सरकार द्वारा, समय-समय पर सौंपी गई, अन्य गतिविधियाँ।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) का प्रोफ़ाइल:
डॉ. इंदु भूषण

डॉ. इंदु भूषण, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जय) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (रा.स्वा.प्रा.), भारत सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. भूषण भारतीय सिविल सेवा, 1983 राजस्थान कैडर के एक पूर्व-भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई ए एस) अधिकारी हैं। उन्होंने जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, यूएसए से स्वास्थ्य अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट एवं स्वास्थ्य विज्ञान में मास्टर्ज़ डिग्री हासिल की है। वे प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (आईआईटी बीएचयू) और आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं, जहाँ उन्होंने बी.टेक और स्नातकोत्तर डिप्लोमा पूरा किया। वे एक चार्टर्ड वित्तीय विश्लेषक (सी एफ ए) भी हैं।

डॉ. भूषण एक नौकरशाह से अर्थशास्त्री बने, जिनकी 35 सालों की सेवाकाल विभिन्न क्षेत्रों में गुज़री। सरकारी सेवा छोड़ने से पहले, वे आई ए एस में नौ साल तक कार्यरत थे। तत्पश्चात, उन्होंने एशियाई विकास बैंक (ए डी बी) में जाने से पहले, विश्व बैंक समूह मे एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के रूप में भी काम किया। एबी पीएम-जय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) नियुक्त होने तक, डॉ. भूषण एशियाई विकास बैंक (ए डी बी) के पूर्वी एशिया विभाग के महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे। एशियाई विकास बैंक में उन्होंने कई पदों पर कार्य किया, जिसमें महानिदेशक, सामरिक एवं नीति विभाग शामिल हैं और चीन, हांगकांग, कोरिया गणराज्य, मंगोलिया और ताइवान के साथ 12.6 बिलियन डॉलर के पोर्टफोलियो के सहित 113 परियोजनाओं के प्रबंधन का भी श्रेय है। डॉ. भूषण ने ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों, परिवहन, सार्वजनिक प्रबंधन, वित्तीय और क्षेत्रीय सहयोग, शहरी और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों को प्रशासित और निरीक्षण करने का काम किया। उन्होंने चीन और मंगोलिया में एशियाई विकास बैंक के निवासी मिशनों का भी पर्यवेक्षण किया।

डॉ. भूषण नई दिल्ली में अपनी पत्नी अंजना के साथ रहते हैं, जो एक पूर्व आई ए एस अधिकारी हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) के साथ काम करतीं हैं। उनकी दो बेटियाँ, देविका और अंबिका, मेडिकल डॉक्टर हैं और दोनो अमरीका में रहती हैं । वह सप्ताहांत में ब्रिज खेलना एवं नवीनतम फिल्मों और नाटकीय शो देखना पसंद करतें हैं।

अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी


डॉ.प्रवीण गेडाम राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (रा.स्वा.प्रा.) के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, जो आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जय) एवं राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एन.डी.एच.एम) की क्रियान्वयन संस्था है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी होने के नाते आप तमाम कार्यों की निगरानी रखने के साथ-साथ, मंत्रालयों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से किसी भी रूप में जुड़े संगठनों, राज्य सरकारों एवं अन्य हितधारकों के साथ समन्वय करने का काम करते हैं। आप भारत सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं के नीति निर्माण, डिजाइन और कार्यान्वयन के प्रभारी रहे हैं। आयुष्मान भारत: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार द्रारा वित्त-पोषित दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना है और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का उद्देश्य सभी के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवा सुगमता से उपलब्ध कराना है।


डॉ . प्रवीण गेदाम

डॉ. गेडाम ने सरकारी सेवा (आइएएसः2002 महाराष्ट्र ) में अपना करियर शुरू करने के पूर्व अपनी चिकित्सकीय पढ़ाई पूर्ण कर लिया था। एक चिकित्सक के रूप में आप अपनी पहचान बना चुके थे। आपने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और भारत सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री के निजी सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके पूर्व महाराष्ट्र शासन में कई महत्वपूर्ण पदों को आपने सुशोभित किया हैं। महाराष्ट्र के परिवहन आयुक्त रहते हुए विभाग में कंप्यूटर-केन्द्रित कार्य-प्रणाली को बढ़ावा देने का श्रेय आपको जाता है। डॉ. गेडाम ने महाराष्ट्र के कई शहरों और जिलों के नगर आयुक्त और जिला कलेक्टर के रूप में भी अपनी सेवाएं दी है।

डॉ. गेडाम ने जमीनी स्तर पर सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित तमाम कार्यों को क्रियान्वित किया है, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी का निर्वहन भी शामिल रहा है। महाराष्ट्र के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार लातूर जिला में लक्ष्य बनाकर व्यवस्थित चिकित्सा जांच और बड़े पैमाने पर सामुदायिक-संवाद के माध्यम से मातृ और बाल स्वास्थ्य संकेतकों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए वे जाने जाते हैं। 2015 में, उन्हें नासिक में कुंभ-मेला के मेगा-इवेंट के आयोजन और प्रबंधन का काम सौंपा गया, जिसे पृथ्वी पर सबसे बड़ी मानवीय सभाओं में से एक माना जाता है।

उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी


डॉ.विपुल अग्रवाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (रा.स्वा.प्रा.) के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। आप संगठनात्मक पदानुक्रम में तीसरे सर्वोच्च अधिकारी हैं और संगठन के मामलों के प्रबंधन में सीईओ, रा.स्वा.प्रा. की सहायता के लिए भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हैं।

जीवन यात्राः डॉ. विपुल अग्रवाल,उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (रा.स्वा.प्रा.)
डॉ विपुल अग्रवाल

डॉ.विपुल अग्रवाल गुजरात कैडर (2001 बैच) के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं। आप एक चिकित्सक होते हुए भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। विगत 19 वर्षों का कार्यानुभव रखने वाले डॉ.विपुल की पहचान एक व्यावहारिक व सक्रिय अधिकारी के रूप में रही है।

डॉ.विपुल अग्रवाल बचपन से ही पढ़ने-लिखने व समझने में कुशाग्र थे। डॉ. अग्रवाल ने माध्यमिक विद्यालय परीक्षा ( दसवीं कक्षा ) में अखिल भारतीय स्तर पर सर्वोच्च अंक प्राप्त किया। आपने प्रतिष्ठित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से फोरेंसिक चिकित्सा में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक किया। सरदार वल्लभ भाई राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में आप अपने बैच के टॉपर रहे। इतना ही नहीं "सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला प्रशिक्षु अधिकारी" के लिए प्रतिष्ठित गृह मंत्री के रिवॉल्वर और प्रधानमंत्री के बैटन सम्मान के प्राप्तकर्ता भी रहे।

डॉ. अग्रवाल ज्ञान के उपासक रहे हैं। यही कारण है कि उनकी झोली तमाम तरह की डिग्री एवं डिप्लोमाओं से भरी पड़ी है। कुछ का नाम लेना समीचिन है। आपने उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में स्नातकोत्तर, अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर और इंदिरा गांधी खुला विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। वर्तमान में गुजरात विश्वविद्यालय से मानव संसाधन प्रबंधन में पीएच.डी.कर रहे हैं।

एक दूरदर्शी पुलिस अधिकारी व परिवर्तन वाहक के रूप में डॉ. अग्रवाल अपने सेवा काल में असंभव प्रतीत होने वाली चुनौतियों को स्वीकारते रहे हैं। वे जिस भी सरकारी विभाग में गए अपने कर्तव्य-निर्वहन के प्रति समर्पित रहे एवं समय-समय पर उन्हें पदोन्नति भी मिलती रही। गुजरात में अपने सेवा-काल के दौरान डॉ.अग्रवाल ने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने व अपराध नियंत्रण की दिशा में अनुकरणीय कार्य किया। इतना ही नहीं आपने अपनी योजनाओं में सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी। इससे समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए। डॉ. अग्रवाल ने पोरबंदर, बनासकांठा और दाहोद जिलों के पुलिस अधीक्षक के रूप में भी अपनी सेवाएं दी। आपने अहमदाबाद शहर के संयुक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) के रूप में भी बेहतरीन कार्य किया। यह एक बड़ी जिम्मेदारी थी इसमें प्रशासनिक जिम्मेदारियों, मानव संसाधन के साथ-साथ वित्त प्रबंधन की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर थी। इसके अलावा, आपने गुजरात राज्य स्वास्थ्य विभाग में प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया, एन.आर.एच.एम एवं गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को भी आपने अपनी सेवाएं दी।

राज्य स्वास्थ्य अभिकरण


रा.स्वा.अ. एक नोडल एजेंसी है, जो सीईओ की अध्यक्षता में राज्य में पीएम-जय के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है। योजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कार्य करने के लिए रा.स्वा.अ. अतिरिक्त कर्मचारी रख सकता है या कार्यान्वयन सहायता (आईएसए) लगा सकता है। सीईओ रा.स्वा.अ. राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है और वह रा.स्वा.अ. की शासी निकाय का पदेन सदस्य सचिव होता है। राज्य में पीएम-जय के कार्यान्वयन के दिन-प्रतिदिन के संचालन के साथ-साथ, रा.स्वा.अ. डेटा साझाकरण, सत्यापन और परिवार के सदस्यों के सत्यापन, आईईसी, योजना की निगरानी आदि के लिए भी जिम्मेदार है।

रा.स्वा.अ. की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ
  • राज्य स्वास्थ्य आश्वासन / बीमा योजना के नीति संबंधी मुद्दे और पीएम-जय से इसका जुड़ाव
  • पीएम-जय के साथ राज्य योजना का संयोजन
  • निविदा प्रक्रिया के माध्यम से बीमा कंपनी का चयन (यदि बीमा कंपनियों के माध्यम से पीएम-जय को लागू करना)
  • यदि आवश्यक हो तो कार्यान्वयन सहायता एजेंसियों का चयन (ट्रस्ट / सोसायटी मोड में)
  • जागरूकता सृजन और मांग निर्माण
  • वैध लाभार्थियों को आधार सीडिंग और ई-कार्ड का प्रिंट आउट जारी करना
  • मानदंडों को पूरा करने वाले नेटवर्क अस्पतालों का पैनल
  • स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की निगरानी
  • धोखाधड़ी और दुरुपयोग नियंत्रण
  • धोखाधड़ी और भ्रष्ट प्रथाओं के लिए प्रदाताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई
  • पूर्व-प्राधिकरणों की निगरानी जो पहले से ही बीमाकर्ता / आईएसए द्वारा अनुमोदित हैं
  • अस्पताल प्रशासन का दावा है जो पहले से ही बीमाकर्ता / आईएसए द्वारा अनुमोदित हैं
  • पैकेज मूल्य संशोधन या पीएम-जयसूची का अनुकूलन
  • राज्य की जरूरतों के लिए सूचीबद्ध चिकित्सा के लिए पीएम-जय उपचार प्रोटोकॉल का पालन करना
  • जहां आवश्यक हो, रां.स्वा.प्रा. के परामर्श से परिचालन दिशानिर्देशों को अपनाना
  • शिकायत निवारण समितियों का गठन करना और शिकायत निवारण तंत्र की देखरेख करना
  • क्षमता विकास योजना और क्षमता विकास पहल करना
  • सार्वजनिक प्रदाताओं और उसके कार्यान्वयन के लिए नीतिगत परिवर्तनों के लिए प्रस्तावों के विकास का विकास
  • पीएम-जय के तहत बीमा कंपनी को प्रीमियम जारी करने के उद्देश्यों के लिए स्थापित एस्क्रो खाते के माध्यम से धन का प्रबंधन
  • डाटा प्रबंधन
  • स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से मूल्यांकन
  • जिला स्तर के कार्यालय स्थापित करना और जिले के लिए कर्मचारियों की भर्ती करना
  • ओवरसीज जिला स्तरीय कार्यालय
  • योजना डेटा और कार्यान्वयन स्थिति के आधार पर आवधिक रिपोर्ट तैयार करना
  • राष्ट्रीय मार्गदर्शन के अनुरूप आशा कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक प्रदाताओं के लिए प्रोत्साहन प्रणाली लागू करना
जिला कार्यान्वयन इकाई

योजना के तहत शामिल हर जिले में कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए राज्य स्तरीय इकाई के अलावा, एक जिला कार्यान्वयन इकाई (डीआईयू) भी स्थापित है। यह टीम बीमा कंपनी / आईएसए द्वारा तैनात टीम के अतिरिक्त होगी। डीआईयू की अध्यक्षता जिले के उपायुक्त / जिला मजिस्ट्रेट / कलेक्टर करेंगे। यह इकाई प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कार्यान्वयन एजेंसी (आईएसए / बीमाकर्ता) और नेटवर्क अस्पतालों के साथ समन्वय करने के लिए है और समय-समय पर समीक्षा रिपोर्ट भी भेजती है। डीआईयू को जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी और उनकी टीम के साथ मिलकर काम करना है।